Sunday, April 29, 2012

gyaan 20

विवेक का ज्ञान 
मैंने सीखा 
      अकेले आये थे अकेले जाना है  और दुनिया में रहते हुए भी आप अक्सर अपने आप को अकेला ही पाते हैं 

मैंने सीखा 
      जो लोग आपके इर्द गिर्द खड़े नज़र आते हैं वो अपने मतलब से वहां खडे हैं, जिस दिन उनका स्वार्थ हल नहीं हुआ वे चले जायेंगे 

मैंने सीखा 
     अगर आप किसी से बहुत ज्यादा सेवा या प्यार करें तो यह आपको दुःख मिलने का कारण बनेगा 

मैंने सीखा 
   जिसे आप अपना समझा उसकी मारी सुई की चोट तलवार सा दुःख देगी 

मैंने सीखा 
   सर टिकाने के लिए कंधा ना हो तो अकेले रोने वाला ज्यादा रोता है 

मैंने सीखा 
    अपने आत्म-सम्मान को मार कर किसी की कोई बात  ना सुनना 

मैंने सीखा 
  स्वयं से प्यार करो , लोगों से प्यार करो, किसी से कोई उम्मीद भी ना करो  

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