विवेक का ज्ञान
मैंने सीखा
अकेले आये थे अकेले जाना है और दुनिया में रहते हुए भी आप अक्सर अपने आप को अकेला ही पाते हैं
मैंने सीखा
जो लोग आपके इर्द गिर्द खड़े नज़र आते हैं वो अपने मतलब से वहां खडे हैं, जिस दिन उनका स्वार्थ हल नहीं हुआ वे चले जायेंगे
मैंने सीखा
अगर आप किसी से बहुत ज्यादा सेवा या प्यार करें तो यह आपको दुःख मिलने का कारण बनेगा
मैंने सीखा
जिसे आप अपना समझा उसकी मारी सुई की चोट तलवार सा दुःख देगी
मैंने सीखा
सर टिकाने के लिए कंधा ना हो तो अकेले रोने वाला ज्यादा रोता है
मैंने सीखा
अपने आत्म-सम्मान को मार कर किसी की कोई बात ना सुनना
मैंने सीखा
स्वयं से प्यार करो , लोगों से प्यार करो, किसी से कोई उम्मीद भी ना करो